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हम देखेंगे

(मशहूर पाकिस्तानी ग़ज़ल गायिका इक़बाल बानो का पिछले दिनों देहांत हो गया।याह्या खाँ के शासन के विरोध में उनके द्वारा गायी गयी यह नज़्म फैज़ ने लिखी थी।)लाज़िम है कि हम भी देखेंगेहम देखेंगे .......वो दिन कि जिसका वादा हैजो लौह-ए-अजल में लिखा हैहम देखेंगे .......जब जुल्म ए सितम के कोह-ए-गरांरुई की तरह उड़ जाएँगेहम महकूमों के पाँव तलेजब धरती धड़ धड़ धड़केगीऔर अहल-ए-हक़म के सर ऊपरजब बिजली कड़ कड़ कड़केगीहम देखेंगे .......जब अर्ज़-ए-खुदा के काबे सेसब बुत उठवाये जायेंगेहम अहल-ए-सफा, मरदूद-ए-हरममसनद पे बिठाए जाएंगेसब ताज उछाले जाएंगेसब तख्त गिराए जाएंगे.......बस नाम रहेगा अल्लाह काजो गायब भी है हाजिर भीजो नाजिर भी है मंज़र भीउठेगा अनलहक का नाराजो मैं भी हूँ और तुम भी होऔर राज करेगी ख़ल्क-ए-ख़ुदाजो मैं भी हूँ और तुम भी होहम देखेंगे...

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