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अमीर खुसरो

अमीर खुसरो को खड़ी बोली हिन्‍दी का पहला कवि माना जाता है. इस भाषा का हिन्‍दवी नाम से उल्‍लेख सबसे पहले उन्‍हीं की रचनाओं में मिलता है. हालांकि वे फारसी के भी अपने समय के सबसे बड़े भारतीय कवि थे, लेकिन उनकी लोकप्रियता का मूल आधार उनकी हिन्‍दी रचनाएं ही हैं. अबुल हसन यमीनुद्दीन मुहम्मद का उपनाम खुसरो था, जिसे दिल्ली के सुलतान ज़लालुद्दीन खिलज़ी ने अमीर की उपाधि दी. उन्होंने स्वयं कहा है- ‘’मैं तूती-ए-हिन्‍द हूं. अगर तुम वास्तव में मुझसे जानना चाहते हो तो हिन्दवी में पूछो. मैं तुम्हें अनुपम बातें बता सकूंगा.’’ एक अन्‍य स्थान पर उन्होंने लिखा है, ‘’तुर्क हिन्दुस्तानियम मन हिंदवी गोयम जवाब (अर्थात् मैं हिन्दुस्तानी तुर्क हूं, हिन्दवी में जवाब देता हूं.)’’  अमीर खुसरो को दिल्‍ली सल्‍तनत का राज्‍याश्रय हासिल था. अपनी दीर्घ जीवन-अवधि में उन्‍होंने गुलाम वंश, खिलजी वंश से लेकर तुगलक वंश तक 11 सुल्‍तानों का सत्ता-संघर्ष देखा था,लेकिन राजनीति का हिस्‍सा बनने

हिन्दी साहित्य का आदिकाल -नामकरण की समस्या

आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने हिन्दी साहित्य के आदिकाल को वीरगाथा काल नाम दिया है. इसके लिए तर्क देते हुए वो कहते हैं- “ राजाश्रित कवि और चारण जिस प्रकार नीति, श्रृंगार आदि के फुटकल दोहे राजसभाओं में सुनाया करते थे, उसी प्रकार अपने आश्रयदाता राजाओं के पराक्रमपूर्ण चरितों या गाथाओं का वर्णन भी किया करते थे। यही प्रबंध परंपरा 'रासो' के नाम से पाई जाती है, जिसे लक्ष्य करके इस काल को हमने, 'वीरगाथाकाल' कहा है।             प्रवृत्ति के निर्धारण के लिए भी आचार्य शुक्ल ने दो कसौटियां निर्धारित की हैं: (क)   विशेष ढंग की रचना की प्रचुरता (ख)   विशेष  ढंग की रचना की लोक प्रसिद्धि            आदिकाल की समयसीमा में शुक्लजी ने हिन्दी भाषा की 12 रचनाएँ ढूंढ कर सामने रखी हैं- 1)      खुमाण रासो 2)      विजयपाल रासो 3)      हम्मीर रासो 4)      परमाल रासो (आल्हा) 5)      बीसलदेव रासो 6)      पृथ्वीराज रासो 7)      जयचंद्र प्रकाश 8)      जयमयङ्क जसचन्द्रिका 9)      कीर्तिलता 10)   कीर्तिपताका 11)   विद्यापति की पदावली 12)   अमीर खुसरो की पहेलियाँ शुक्लजी के अनुसार ,

हिन्दी साहित्य का इतिहास -प्रारम्भ

राहुल सांकृत्यायन ने अपनी पुस्तक ‘काव्यधारा’ में 7वीं सदी के अपभ्रंश के कवि सरहपा को हिन्दी का पहला कवि माना है. डॉ रामकुमार वर्मा हिन्दी साहित्य का प्रारम्भ संवत् 750 से मानते हैं. जॉर्ज ग्रियर्सन के अनुसार, हिन्दी साहित्य की शुरुआत संवत् 700 (643 ई) से होती है. स्पष्टतया, अधिकांश विद्वान अपभ्रंश के उस दौर से प्रारम्भिक हिन्दी की शुरुआत मानते हैं, जहाँ सहायक क्रियाओं और परसर्गों का विकास साफ़ परिलक्षित होने लगता है. हिन्दी साहित्य का इतिहास लिखने की पहली कोशिश फ्रांस के गार्सा द तासी ने की. तासी रचित ‘इस्त्वार द ल लितरेत्यूर ऐन्दूई ऐन्दूस्तानी’ का प्रथम भाग 1839 में और द्वितीय भाग 1847 में प्रकाशित हुआ. 1883 ई में शिवसिंह सेंगर का शिवसिंह सरोज प्रकाशित हुआ. इसमें लगभग एक हज़ार कवियों की रचनाओं और उनके जीवन का संक्षिप्त परिचय मिलता है. इस लिहाज़ से यह पुस्तक साहित्येतिहास से ज्यादा कविवृत्तसंग्रह है. इसी पुस्तक को आधार बनाकर जॉर्ज ग्रियर्सन

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