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फूलचंद का स्कूटर- कुंदन यादव की कहानी

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      फूलचंद ठेकेदार दोपहर का भोजन करके सोने के बाद उठे, घड़ी की तरफ देखा. साढ़े तीन बजने वाले थे. उन्होंने जल्दी से चेहरा धोया और सुँघनी मंजन करते हुए घर से बाहर चबूतरे पर आए. मंजन करते हुए जब दाईं तरफ नज़र गई तो देखा स्कूटर नहीं था. थोड़ी देर में उनको अपनी निर्माणाधीन साइट पर जाना था . कुल्ला करके मुंह धोते हुए भीतर आए और पत्नी से पूछा राजू स्कूटर ले गया है क्या? पत्नी ने कहा नहीं वो तो ऊपर सो रहा है. चूंकि छोटा बेटा राजू स्कूटर बाइक आदि चलाना सीख ही रहा था इसलिए गाहे बगाहे वो स्कूटर लेकर गायब हो जाता. बेटी रीना टीवी देख रही थी. उन्होंने उससे भी स्कूटर की बाबत भी पूछा कि कोई मांग तो नहीं ले गया , लेकिन कोई सकारात्मक जवाब न देख वे चिंतित हो उठे. नीचे आकर कुर्ता पाजामा पहन बाहर निकले थे

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